Saturday, 8 July 2017

सार छंद

सार छंद
धन दौलत अउ माल खजाना,छोड़ एक दिन जाना।
कंचन काया माटी होही,काबर जी इतराना।।

ये दुनिया ला जानौ संगी,दू दिन अपन ठिकाना।
सब संग रहौ मिलजुल संगी,रिश्ता नता निभाना।।

बैर कपट ला दुश्मन जानौ,गीत मया के गाना।
मुट्ठी बाँधे आय जगत में,हाथ पसारे जाना।।

सुग्घर मनखे तन ला पा के,जिनगी सफल बनाना।
गुरतुर बोली बोल मया के,हिरदे अपन बसाना।।

दया मया अउ करम धरम हा,सबले बड़े खजाना।
सत्य प्रेम के पाठ पढ़ौ अउ,सबला हवै पढ़ाना।।
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