Wednesday, 23 August 2017

रोला छंद

बरसा हवै पदोय,गिरत नइये जी काबर।
सुक्खा खेतीखार,भरोसा करबो काखर।।
रोवत हवै किसान,देख के अपन किसानी।
आसो परे  अकाल,चलै कइसे जिनगानी।।

ज्ञानु

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